कोविड-19 वैक्सीन कैसे काम करती है / How the COVID-19 vaccine works

COVID-19 वैक्सीन मुफ्त, स्वैच्छिक है और न्यूज़ीलैंड में 12 और उससे अधिक आयु वाले हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध है।

बुकिंग करने के लिए Book My Vaccine (बुक माई वैक्सीन) पर जाएं, या नीचे दिए नंबर पर कोविड टीकाकरण हैल्थलाइन को फोन करें।

कोविड-19 वैक्सीन मुफ्त, स्वैच्छिक है और न्यूज़ीलैंड में 16 और अधिक आयु वाले हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध है।

जब आप वैक्सीन लगवाते हैं, तो आप खुद को सुरक्षित करते हैं और अपने परिवार, मित्रों और समुदाय तक कोविड-19 फैलने के खतरे को कम कर देते हैं।

एक बार पूरी वैक्सीन प्राप्त होने के बाद, आपके गंभीर रुप से बीमार पड़ने की संभावना कम है।

वैक्सीन आपके प्रतिरक्षा तंत्र को वायरस की पहचान करना और उससे लड़ना सिखाती है।

यहां आप वैक्सीन की कार्यप्रणाली के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी पाएंगे।

mRNA वैक्सीनें

फ़ाइजर वैक्सीन एक mRNA वैक्सीन है। इसमें SARS-CoV-2 (कोविड-19) वायरस के एक प्रमुख हिस्से, ‘स्पाइक प्रोटीन’ का आनुवंशिक कोड है। स्पाइक प्रोटीन वायरस की सतह पर छोटे प्रक्षेप (उभार) होते हैं।

आपको एक बार वैक्सीन लग जाने के बाद, आपका शरीर जेनेटिक कोड को पढ़ता है और स्पाइक प्रोटीन की नकल बना लेता है।

आपका प्रतिरक्षा तंत्र इन स्पाइक प्रोटीनों की पहचान करता है और सीखता है कि कैसे कोविड-19 की पहचान की जाए और उससे लड़ा जाए। इसे पता है कि आपके शरीर में फैलने से बचाने के लिए इसे वायरस पर हमला करना होगा।

उसके बाद वैक्सीन का जेनेटिक कोड अतिशीघ्र और आसानी से आपके शरीर में निष्क्रिय कर दिया जाता है और हटा दिया जाता है। 

mRNA वैक्सीनों के बारे में जानने के लिए आवश्यक जानकारी

वैक्सीन से आपको कोविड-19 नहीं हो सकता

mRNA वैक्सीनों में ऐसा कोई वायरस नहीं है जिससे कोविड-19 हो सकता हो, या अन्य कोई जीवित, मृत या निष्क्रिय वायरस नहीं है।

वैक्सीन आपके DNA को प्रभावित नहीं करती है

यह आपके DNA या जीन्स को प्रभावित या उससे प्रतिक्रया नहीं करती है। mRNA वैक्सीनें कभी कोशिका के नाभिक में नहीं जातीं जहां हमारा DNA होता है।

mRNA वैक्सीनों का विकास कई दशकों से किया जा रहा है।

mRNA वैक्सीनें प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बनाई गई हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने दशकों से mRNA वैक्सीनों पर परीक्षण और काम किया है। इसमें फ्लू, जीका, रेबीज और साइटोमेगालो वायरस (CMV) की वैक्सीनों के अनुसंधान शामिल हैं।

वैज्ञानिकों ने पुराने कोरोनावायरस संक्रमण जैसे SARS और MERS पर भी अनुसंधान किया है।वैज्ञानिकों द्वारा कोविड-19 का कारण बनने वाले मूल कोरोनावायरस की पहचान करने के बाद, उन्होंने शीघ्र ही कोविड-19 के खिलाफ तकनीक अपनाई।

हालांकि, यह अपेक्षाकृत नई तकनीक है, लेकिन यह वैक्सीन सभी सामान्य सुरक्षा परीक्षणों और विनियमों से गुजर चुकी है।

वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा प्रमाणित करने के लिए किए गए अंतर्राष्ट्रीय क्लीनिकल परीक्षण भी इसमें शामिल हैं। फ़ाइजर की वैक्सीन विश्व भर में प्रयोग की जा रही है और प्रभावशीलता और सुरक्षा के लिए निरंतर और ध्यानपूर्वक जांची जा रही है।